ग्लोबल टेंशन से सहमा बाजार, लेकिन 100 रुपये से सस्ते इस मल्टीबैगर में मची है लूट
आज सोमवार, 29 जून 2026 को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत काफी नर्वस रही। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से भड़की सैन्य झड़पों की खबरों ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स के माथे पर सिलवटें ला दी हैं। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सूचकांकों ने गोता लगाया। बीएसई सेंसेक्स 246.54 अंक टूटकर 76,853.93 पर आ गया, जबकि निफ्टी 50.55 अंक फिसलकर 24,005.45 के स्तर पर संघर्ष करता दिखा।
इस भारी गिरावट वाले माहौल में कोटक महिंद्रा बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अदाणी पोर्ट्स और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे दिग्गज शेयर बाजार पर दबाव बना रहे हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल भी 0.72% की उछाल के साथ $72.51 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है, जो साफ इशारा है कि बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. का भी यही मानना है कि भले ही अमेरिका और ईरान आगे हमले रोकने पर सहमत हो गए हों, लेकिन इस झटके ने ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स में एक डर तो पैदा कर ही दिया है, जिससे नियर-टर्म में इन्वेस्टर सेंटिमेंट काफी सतर्क रहने वाला है।
गिरते बाजार में वैल्यूएशन की तलाश और एक धांसू ब्रेकआउट
तेजी से शिखर छूने के बाद जब इंडेक्स इस तरह की जिओपॉलिटिकल टेंशन का शिकार होते हैं, तो निवेशकों को सबसे ज्यादा डर हाई वैल्यूएशन वाले स्टॉक्स का सताता है। ऐसे में स्मार्ट पैसा उन स्टॉक्स की तरफ भागता है जहां फंडामेंटल्स मजबूत हों और वैल्यूएशन आकर्षक। इस उथल-पुथल के बीच पैरामाउंट कम्युनिकेशंस लिमिटेड (Paramount Communications Ltd) एक ऐसा मल्टीबैगर बनकर उभरा है, जिसने बाजार की गिरावट को ठेंगा दिखा दिया है।
हालिया कारोबारी सत्र (विशेषकर शुक्रवार की ट्रेडिंग) में पैरामाउंट कम्युनिकेशंस के शेयरों में 9% से ज्यादा का तगड़ा उछाल देखा गया और यह स्टॉक 98.50 रुपये के लेवल पर पहुंच गया। चार्ट्स की बात करें तो इस शेयर ने डेली चार्ट पर अपनी अपर रेंज को तोड़ते हुए एक शानदार ब्रेकआउट दिया है। इसका 52-हफ्तों का हाई 116.70 रुपये और लो 51.20 रुपये रहा है। जिस तरह से कमाई और मार्जिन सुधर रहे हैं, उसे देखकर विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भी इसमें अपनी हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहे हैं। वैसे भी एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, पिछले गुरुवार (25 जून 2026) को भी FIIs ने बाजार में ₹383.76 करोड़ की खरीदारी की थी, जो दिखाता है कि वे क्वालिटी स्टॉक्स में पैसा डालने से नहीं हिचक रहे हैं।
कर्ज-मुक्त होने की राह और सॉलिड फंडामेंटल्स
पैरामाउंट कम्युनिकेशंस हवा-हवाई बातों पर नहीं, बल्कि अपने मजबूत बहीखातों पर दौड़ रहा है। कंपनी ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का पूरा बकाया लोन चुकता कर दिया है। इसे बाद में इन्वेंट एसेट्स सिक्यूरिटाइजेशन एंड रिकंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने टेकओवर किया था, लेकिन अब इन्वेंट के प्रति भी कंपनी की कोई देनदारी नहीं बची है। 86.25 करोड़ रुपये का लोन पूरी तरह से चुकाने के बाद यह कंपनी चालू वित्त वर्ष के अंत तक पूरी तरह से डेट-फ्री होने की राह पर है। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो महज 0.16 और करेंट रेशियो 3.40 है, जो इसकी बैलेंस शीट की ताकत को दर्शाता है।
अपने ऑपरेशंस को और धार देने के लिए कंपनी ने 5 करोड़ अतिरिक्त इक्विटी शेयर जारी करके अपनी ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल को 80 करोड़ से बढ़ाकर 90 करोड़ रुपये करने का प्लान बनाया है। 19 सितंबर, 2024 की एजीएम में शेयरधारकों से 400 करोड़ रुपये तक जुटाने की मंजूरी मांगी गई थी, जो इसके एक्सपेंशन प्लान का एक अहम हिस्सा है।
क्लाइंट बेस और प्रॉफिटेबिलिटी
पावर, टेलीकॉम, रेलवे और स्पेशियलिटी केबल्स बनाने वाली इस कंपनी के पास 555.80 करोड़ रुपये की एक भारी-भरकम ऑर्डर बुक है। अगर आप इनके क्लाइंट्स की लिस्ट देखेंगे तो उसमें लार्सन एंड टुब्रो (L&T), सेल (SAIL), भेल (BHEL), पावर ग्रिड, टाटा स्टील, इसरो (ISRO) और इंडियन रेलवे जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं।
फाइनेंशियल परफॉरमेंस की बात करें तो आंकड़े खुद गवाही देते हैं:
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Q1FY25 का शानदार प्रदर्शन: नेट सेल्स 52.5% उछलकर 321.06 करोड़ रुपये हो गई। ऑपरेटिंग प्रॉफिट 61.6% बढ़कर 29.91 करोड़ रुपये और प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 74.1% के जंप के साथ 25.30 करोड़ रुपये रहा।
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FY24 का सालाना रिपोर्ट कार्ड: पूरे वित्त वर्ष 24 में नेट सेल्स 32.7% बढ़कर 1,078.56 करोड़ रुपये रही, वहीं PAT 79.3% की जबरदस्त ग्रोथ के साथ 85.63 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
एक तरफ जहां एशियन पेंट्स, ट्रेंट और इटरनल जैसे कुछ चुनिंदा स्टॉक्स आज के रेड मार्केट में भी हरियाली दिखा रहे हैं, वहीं पैरामाउंट कम्युनिकेशंस जैसे मजबूत ऑर्डर बुक और बेहतरीन प्रोडक्शन कॉस्ट एफिशिएंसी वाले स्टॉक्स यह साबित करते हैं कि बाजार चाहे कितना भी नर्वस क्यों न हो, क्वालिटी बिजनेस हमेशा अपनी कीमत तलाश ही लेता है। प्रोडक्शन बढ़ने से इनकी लागत कम हो रही है और सीधा असर प्रॉफिटेबिलिटी पर दिख रहा है। ऐसे में यह कोई ताज्जुब की बात नहीं है कि बाजार की इस भारी आंधी में भी यह छोटा सा स्टॉक मजबूती से अपने पैर जमाए हुए है।