ओपनएआई की रिपोर्ट से शेयर बाजार धड़ाम, उधर भू-राजनीतिक तनाव और यूएई के ओपेक छोड़ने से कच्चे तेल में उबाल
मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में खासी गिरावट देखने को मिली। S&P 500 इंडेक्स 0.7% लुढ़क गया, जबकि टेक कंपनियों से भरे नैस्डैक में 1.3% की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, डाओ जोंस मामूली 41 अंकों (0.1%) की बढ़त के साथ बंद होने में कामयाब रहा। डाओ को संभालने का पूरा श्रेय कोका-कोला के शानदार नतीजों को जाता है, जिसके चलते कंपनी के शेयरों में 5% से ज्यादा का उछाल आया। सोमवार को ही S&P 500 और नैस्डैक ने रिकॉर्ड ऊंचाई छुई थी, लेकिन अगले ही दिन यह तेजी गायब हो गई।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक ताजा रिपोर्ट ने टेक सेक्टर की नींद उड़ा दी है। खबर है कि ओपनएआई (OpenAI) के रेवेन्यू और नए यूजर्स की संख्या कंपनी के अपने तय लक्ष्यों से काफी पीछे चल रही है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कंपनी की सीएफओ सारा फ्रायर ने मैनेजमेंट को साफ चेताया है। उनका मानना है कि अगर कमाई की रफ्तार तेजी से नहीं बढ़ी, तो भविष्य में ओपनएआई के लिए अपने कंप्यूटिंग कॉन्ट्रैक्ट्स का भुगतान करना मुश्किल हो जाएगा।
इस खबर का सीधा असर चिप और दिग्गज टेक स्टॉक्स पर पड़ा। एनवीडिया के शेयर 3% से ज्यादा टूट गए, वहीं ब्रॉडकॉम में 4% की बड़ी गिरावट आई। एएमडी, इंटेल और ओरेकल के शेयर भी 4-4% तक गिर गए। इंटीग्रेटेड पार्टनर्स के सीआईओ स्टीफन कोलानो का कहना है कि ‘मैग्निफिसेंट सेवन’ कंपनियों के नतीजों से ठीक पहले निवेशक थोड़ी सतर्कता बरत रहे हैं और जमकर मुनाफावसूली कर रहे हैं। इस हफ्ते बाजार की नजरें इन दिग्गज कंपनियों की अर्निंग्स रिपोर्ट पर टिकी हैं। बुधवार को अल्फाबेट, अमेजन, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट के नतीजे आने हैं, जबकि गुरुवार को एप्पल अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करेगा।
अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में गतिरोध बाजार की इस घबराहट के पीछे सिर्फ टेक सेक्टर ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति भी एक बड़ी वजह है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता फिलहाल खटाई में पड़ती नजर आ रही है। वीकेंड पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के पाकिस्तान दौरे को रद्द कर दिया। इस दौरे का मुख्य मकसद ईरान में युद्धविराम की संभावनाओं पर चर्चा करना था। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि बातचीत अब केवल फोन पर ही हो सकती है। दूसरी तरफ, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने भी कह दिया है कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच फिलहाल किसी भी बैठक की योजना नहीं है।
तमाम तनावों के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर एक हल्की सी उम्मीद भी दिखी है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने सोमवार को इस बात की पुष्टि की कि ट्रंप और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने ईरान के एक अहम प्रस्ताव पर चर्चा की है। ईरान ने पेशकश की है कि अगर युद्ध खत्म हो जाता है और अमेरिका अपनी नाकाबंदी हटा लेता है, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए तैयार है।
सप्लाई संकट से क्रूड में आग और यूएई का बड़ा फैसला होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी नाकेबंदी और अनिश्चितता का सीधा असर कच्चे तेल के बाजार पर दिख रहा है। सप्लाई में लगातार हो रही रुकावटों के चलते तेल की कीमतों में जबर्दस्त तेजी बनी हुई है। डब्लूटीआई (WTI) क्रूड 4.2% उछलकर 100.38 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, वहीं ब्रेंट क्रूड 3.7% की तेजी के साथ 112.24 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। ट्रेडू के निकोस त्जाबोरस का कहना है कि अगर सप्लाई का यह संकट बना रहा और कीमतें ऐसे ही आसमान छूती रहीं, तो पूरी ग्लोबल इकॉनमी और खुद कच्चे तेल की मांग के लिए एक बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा।
इसी बीच ऊर्जा बाजार से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 1 मई से ओपेक और ओपेक प्लस से बाहर निकलने का बड़ा ऐलान कर दिया है। यूएई का कहना है कि यह कदम उसके दीर्घकालिक आर्थिक विजन और घरेलू ऊर्जा उत्पादन में निवेश बढ़ाने की रणनीति का अहम हिस्सा है। स्पार्टन कैपिटल के पीटर कार्डिलो के नजरिए से देखें, तो यूएई का यह फैसला लंबे समय में कच्चे तेल की कीमतों को नीचे ला सकता है। उनका मानना है कि ओपेक से यूएई के अलग होने का सीधा मतलब यह है कि युद्ध खत्म होने के बाद बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ेगी, जो इस तेल उत्पादक समूह के लिए एक बड़ा झटका है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने से पहले, इस साल फरवरी में यूएई रोजाना करीब 3.4 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन कर रहा था।