सितम्बर 18, 2021

दिल्‍ली का सीरो सर्वे देख गफलत में मत रहिए, हेल्थ एक्सपर्ट्स ने कहा- आंकड़े दे सकते हैं धोखा

हेल्‍थ एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि अभी सावधानी बरतने की जरूरत है। बाजार में दोबारा जिस तरह से भीड़ लगने लगी है, उससे तीसरी लहर का आना लाजिमी है।

नई दिल्‍ली
कुछ लोग राजधानी में हो रहे सीरो सर्वे की रिपोर्ट देखकर ऐसा सोच रहे हैं कि शहर में अब कोरोना का खतरा नहीं है। कई बार ऐसा हुआ है कि जब सीरो सर्वे में अच्छा परिणाम मिलने के बाद भी दिल्ली में कोरोना के मामले बढ़े हैं। लिहाजा, सीरो रिपोर्ट देखकर लापरवाही न की जाए। सीरो रिपोर्ट में आंकड़े जो भी हों, आप मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और बार-बार हाथ धोने जैसे नियमों का पालन करते रहें। ये बातें हेल्थ एक्सपर्ट्स ने कही हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि दिल्ली सरकार की ओर से जनवरी में हुए सीरो सर्वे में 50 फीसदी से ज्यादा लोगों में एंटीबॉडीज पाईं गई थीं। फिर एम्स ने अपना एक अलग सर्वे किया जिसमें 74 फीसदी लोगों में एंटीबॉडीज पाई गईं, लेकिन इसके बाद भी अप्रैल में दिल्ली की स्थिति बेहद बुरी हो गई थी।

खुद बरतें सावधानी और सतर्क रहें
यदि सीरो सर्वे के आंकड़े देखें तो दिल्ली में यह वेव आनी ही नहीं चाहिए थे। ऐसे में जरूरी है कि सीरो सर्वे को छोड़कर खुद सावधानी बरतें और सतर्क रहें। इस बारे में आरएमएल अस्पताल के डीन डॉ राजीव सूद का कहना है कि दिल्ली में जितने सीरो सर्वे हुए हैं, सभी में लोगों में एंटीबॉडीज का स्तर बढ़ते हुए देखा गया है। जनवरी में 50 फीसदी लोगों में एंटीबॉडीज मिली थीं और जिस तरह से लोग कोरोना संक्रमित होते रहे, तो फरवरी-मार्च तक यह और ज्यादा बढ़ गई होगी लेकिन इसके बाद भी दिल्ली में जो स्थिति देखने को मिली, वह किसी से छिपी नहीं है। उन्‍होंने कहा कि दूसरी बात सीरो सर्वे कुछ गिने-चुने लोगों का सैंपल लेकर किया जाता है और उसी के आधार पर बताया जाता है कि कितने प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडीज मिली हैं। पूरी दिल्ली के सैंपल नहीं लिए जाते। लिहाजा, जरूरी है कि जनता सीरो सर्वे पर फोकस न करके खुद अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का पालन करे। तभी कोरोना कंट्रोल में रह सकता है।

मार्केट में बढ़ रही भीड़
सूद बोले कि अभी देखा जा रहा है कि मार्केट में फिर से भीड़ बढ़ती जा रही है। लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं। दूसरी वेव से भी लोगों को सीख नहीं मिली है। यदि स्थिति ऐसी ही रही तो तीसरी वेव आना लाजिमी है। वहीं, कालरा अस्पताल के सीनियर डॉ आरएन कालरा का कहना है कि यह भी जानने का विषय है कि एंटीबॉडीज कितने समय तक लोगों में रहती हैं। अगर जनवरी का सीरो सर्वे छोड़ दें और उससे पिछला सीरो सर्वे देखें, तो हो सकता है कि उस सर्वे में जितने लोगों में एंटीबॉडीज पाई गई हों, अप्रैल आते-आते उनमें एंटीबॉडीज खत्म हो गई हों। उन्‍होंने कहा कि ऐसे में यह भी जानना जरूरी है कि एंटीबॉडीज कितने समय तक रहती हैं। सीरो सर्वे में दो-चार हजार लोगों को ही शामिल किया जाता है और उसी के आधार पर एंटीबॉडीज का पता लगाया जाता है। इस वक्त जरूरी है कि भले ही दिल्ली में 90 फीसदी लोगों में एंटीबॉडीज मिल जाएं लेकिन सावधानी बरतना न छोड़ें।

हाल ही में एम्स ने जो सीरो सर्वे की रिपोर्ट जारी की थी, उसके लिए जो सैंपल लिए गए थे, वह मार्च में लिए गए थे। अर्बन एरिया के तौर पर साउथ दिल्ली से सैंपल लिए गए थे जिनके आधार पर कहा गया था कि दिल्ली में करीब 74 फीसदी लोगों में एंटीबॉडीज हैं लेकिन इसके बाद भी अप्रैल में स्थिति भयंकर हो गई थी।