फ़रवरी 5, 2023

गणतंत्र दिवस 2023: देश के 16 राज्यों में भेजे जाते हैं फॉरवर्ड में बने तिरंगे

गणतंत्र दिवस 2023: देश के 16 राज्यों में भेजे जाते हैं फॉरवर्ड में बने तिरंगे

गणतंत्र दिवस 2023: देश के 16 राज्यों में भेजे जाते हैं फॉरवर्ड में बने तिरंगे

राग: देश का कोई भी शासकीय पर्व हो बिना अधूरा ही होता है, क्योंकि भारत के कुछ से अधिक राज्यों में बने तिरंगे ही फहरेए जाते हैं। लेकिन, राष्ट्रीय ध्वज को बनाना इतना आसान भी नहीं है। कई नियम तैयार करने के बाद ही एक झंडा होता है। तो चलिए आपको बताते हैं कि किस तरह से मैं तैयार होता है तिरंगा।

मध्य भारत अकाल संघ का इतिहास काफी पुराना है और यह संस्था कई सालों से तिरंगा तैयार कर रही है। आपको बता दें कि उत्तर भारत में ही अकेला एकलौता शहर है, जहां तिरंगा तैयार कर 16 से अधिक राज्यों में भेजा जाता है। मध्य भारत खादी संघ के मंत्री रमाकांत शर्मा ने बताया कि संस्था द्वारा तिरंगे झंडे का निर्माण काफी समय से किया जा रहा है।

1956 में संस्था की स्थापना हुई थी
रमाकांत शर्मा ने बताया कि तिरंगे में विशेष रूप से तीन प्रकार के झंडे यहां तैयार किए जाते हैं, जो 2बाई 3, 4बाई 6 तक के आकार के होते हैं। यहां एक साल में करीब 10 से 12 हजार खादी के झंडे तैयार होते हैं। बताया कि इस केंद्र की स्थापना 1925 में की गई थी। इसके बाद 1956 में इस आयोग का गठन किया गया। राष्ट्रीय ध्वज तैयार करना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। रुई और कपड़ों का सिलेक्शन सबसे महत्वपूर्ण है।

15 विशिष्टताओं के बाद तैयार होता है तिरंगा
ध्वज निर्माता इकाई के प्रबंधक नीलू ने बताया कि लगभग 15 से अधिक अंकों के बाद एक ध्वज बनाया जाता है। इसके लिए सबसे पहले रुई का चुनाव होता है, जिसके बाद कटोरा तैयार होता है। उसके बाद उस कपड़े की सोच नापा जाती है। कपड़ों का वजन भी किया जाता है। इस तरह से करीब 15 नियमों की पालना के बाद एक ध्वज तैयार किया जाता है। यही कारण है कि ध्वज को तैयार करने में काफी समय लगता है। राष्ट्रीय ध्वज समय को कई सारी चिंताओं को भी देखता है, जैसे कपड़े का रंग, अशोक चक्र सहित अन्य सूचनाओं का पालन करना होता है।

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पहले प्रकाशित : 25 जनवरी, 2023, 18:50 IST

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