फ़रवरी 5, 2023

शहीदों के बलिदान गाथा की गवाह रही मिट्‌टी के संग्रह से बना यह समूह, जानें यहां के कब्जे

शहीदों के बलिदान गाथा की गवाह रही मिट्‌टी के संग्रह से बना यह समूह, जानें यहां के कब्जे

शहीदों के बलिदान गाथा की गवाह रही मिट्‌टी के संग्रह से बना यह समूह, जानें यहां के कब्जे

डोमेन्स

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से लेकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित कुल 150 महापुरुषों के जन्म-बलिदान स्थानों की माटी का संग्रह है।
डा. व्यास 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर संग्रहालय में बलिदानियों के जन्म स्थल और उपहार स्थलों की माटी की प्रदर्शनी लगाने लगेंगे।
‘इस मिट्टी से तिलक करो, ये धरती है बलिदान’ के नाम से अभियान 26 जनवरी गणतंत्र दिवस से शुरू किया जाएगा।

बोर। ‘तेरी मिट्टी में मिल जावां…गुल बनके मैं खिल जावां’…फिल्म केसरी का यह गीत हो या फिर जाग्रत फिल्म का ‘इस मिट्‌टी से तिलक करो, ये धरती है बलिदान की…’ ऐसे ही कई गीतों में मातृभूमि के प्रेम को माटी के वाया बखूबी उकेरा गया. इसी पर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शहीदों के जन्म स्थान और बलिदान स्थल की माटी लाकर एक उज्ज्वल संग्रहालय बनाया गया है।

देश की आजादी के लिए प्राणों का उत्सर्ग करने वाले महापुरुषों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के जन्म व बलिदान स्थलों की माटी को एकता कर भोपाल के कोलार क्षेत्र की फाइन एवेन्यू में संग्रहालय स्थापित किया गया है। बग सरकार की मदद के संग्रहालय को प्रख्यात पुरातत्व डॉ. नारायण ने स्थापित किया है। वह कहते हैं कि इस मिट्ठी में शहादत और मातृभूमि के प्रति प्रेम की खुश्बू है। यहां झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से लेकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित कुल 150 महापुरुषों के जन्म-बलिदान स्थानों की माटी का संग्रह है।
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एक साल से इकट्ठे कर रहे हैं मिट्टी
डा. नारायण व्यास ने बताया कि पिछले एक साल से वे महापुरुषों से संबंधित जानकारी एकत्रित कर रहे हैं। उनके जन्म और बलिदान स्थलों की मिट्टी अलग-अलग बॉक्स में भरकर अपने घर में बने निजी संग्रहालय में रखते हैं। डा. व्यास 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर अपने संग्रहालय पर अमर बलिदानियों के जन्म स्थल और स्मारक स्थलों की माटी को लोगों को दिखाने के लिए प्रदर्शनी लगाएंगे।

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मध्य प्रदेश

प्रदेश के शहीदों को दी मुखियाता
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्मभूमि कटक, डा. भीमराव आंबेडकर की महू, झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के बलिदान स्थल हस्ताक्षर, पंडित लाल बहादुर शास्त्री का जन्म स्थल बनारस, चंद्रार का चिह्न का चिह्न स्थल प्रयागराज आजाद पार्क से मिट्‌टी एकत्रित है। साथ ही भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हुए छतरपुर के दशरथ जैन, शुजालपुर से पंडित लीलाधर जोशी, राणा बख्तावर सिंह का समाधि स्थल स्थल, कुंवर चेन सिंह की छतरी सीहोर, तात्या टोपे स्मारक शिवपुरी आदि स्थान से भी प्रदेश के शहीदों व स्वातंत्र्य सेनानियों की मिट्‌टी गया है।

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पाषाण काल ​​के उपकरणों से लेकर डॉक टिकटों का संग्रह है
डा. नारायण व्यास अधीक्षक रहे हैं। 2009 में प्रतिबंध के बाद पाषाण काल ​​के पत्ते के उपकरण संग्रह करना शुरू किया। इसके साथ ही डाक टिकट, चक्कर सहित कई परियोजनाओं का संग्रह करना शुरू किया। वे कहते हैं कि एक साल पहले लोगों को अमर बलिदानियों,स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जानकारी देने का विचार आया। चूंकि मिट्टी या मातृभूमि से सबका अधिकार होता है, इसलिए उनके जन्म और बलिदान स्थल की मिट्टी से एक-दूसरे को जोड़ने के लिए काम करना शुरू कर दिया।
‘इस मिट्ठी से तिलक करो, ये धरती है बलिदान की’
वरिष्ठ पुरातत्वविद डा. नारायण व्यास ने बताया कि अभी भोपाल से 150 अमर बलिदानियों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जन्म व स्मारकों की माटी लोगों के प्रदर्शन का अभियान पूरे प्रदेश में चलेगा। ‘इस मिट्टी से तिलक करो, ये धरती है बलिदान’ के नाम से अभियान भोपाल से अभी 26 जनवरी गणतंत्र दिवस से शुरू किया जाएगा। इसके पीछे एक ही मकसद है कि युवा देश की आजादी के लिए प्राण न्योछावर करने व योगदान देने वाले महापुरुषों के जीवन से प्रेरित हो जाएं।

टैग: स्वतंत्रता सेनानी, स्वतंत्रता आंदोलन, भारत सरकार, गणतंत्र दिवस

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