फ़रवरी 5, 2023

भोपाल समाचार: जानते ही नहीं, बचाते भी हैं बिच्छू; पदार्थ बनते हैं कई औषधियाँ, जानें नए फैक्ट

भोपाल समाचार: जानते ही नहीं, बचाते भी हैं बिच्छू;  पदार्थ बनते हैं कई औषधियाँ, जानें नए फैक्ट

भोपाल समाचार: जानते ही नहीं, बचाते भी हैं बिच्छू; पदार्थ बनते हैं कई औषधियाँ, जानें नए फैक्ट

रिपोर्ट : आदित्य तिवारी

बोर। बिच्छुओं का उपयोग कई बीमारियों के उपचार में होता है। बिच्छुओं से तैयार किए गए तेल का उपयोग गठिया के उपचार में भी किया जाता है। ये जानकारियां वैज्ञानिक सुधीर कुमार जेना के कब्जे में हैं। दरअसल, भोपाल में ‘नेशनल कांफ्रेंस ऑन केसर नोन स्पीशीज ऑफ मध्य प्रदेश’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई।

इस वर्कर में सुधीर जेना ने कहा कि बिच्छूओं के बारे में अधिक जानकारी न होने के कारण ही लोग इन्हें देखते ही मार देते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि कुछ वस्तुओं के बिच्छू को छोड़कर ज्यादातर बिच्छू नहीं होते हैं। उन्होंने बताया कि जानकार इन बिच्छुओं के संरक्षण को लेकर काम कर रहे हैं। यह सजीले संकट से संबंधित व्यक्तियों के संरक्षण को रविवार को आयोजित किया गया था।

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मध्य प्रदेश
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प्रणय नृत्य करते हैं नर व मां बिच्छू

सुधीर जेना ने बताया कि नर और मादा बिच्छू देखने में लगभग एक जैसे ही होते हैं। इस वजह से उनकी पहचान करना बहुत मुश्किल होता है। उन्होंने बताया कि नर और मां बिच्छू मिलन से पहले प्रणय नृत्य करते हैं। इस दौरान नर बिच्छू अपने पद के टंककों से महिला के पद के टंककों को पकड़ लेता है। दोनों का मुख आमने सामने होता है और पीछे का हिस्सा ऊपर उठ जाता है। प्रणय से पूर्व नर बिच्छू पत्थर के नीचे बिल बनाता है, जिसमें दोनों धंस हो जाते हैं। प्रणय के बाद नर बिच्छू को अपनी जान जानी है और उसे बिच्छू खा जाता है।

 

चंबल क्षेत्र में व्यापर पर मंदरा होने का खतरा

इस वर्कर के पहले दिन बाम्बे संबंधित क्रॉनिक सोसाइटी की परवीन ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में भारतीय प्राधिकरण के संरक्षण के कार्यों की जानकारी दी। सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर। शौमिता मुखर्जी ने जंगली छोटे ठिकानों पर जा रहे हैं तलाश की जानकारी दी। प्रफुल्ल चौधरी एवं सेवाराम के मालिक भारतीय भेड़िये व डेविड राजू द्वारा मप्र में पाए जाने वाले सुपरस्प्स की जानकारी दी गई। चंबल क्षेत्र में शैतान पर मंदरा रहे खतरों का विस्तार तेजी से चर्चा में आया। संस्था के सहायक कर्मी डा. सुरजीत नरवरे ने खरमोर पक्षी के संरक्षण की भी जानकारी दी।

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