जनवरी 28, 2022

भारत के ज्ञान, संस्कृति के प्रसार में हिंदी की अहम भूमिका: पीएम मोदी

NDTV News


पीएम मोदी ने कहा कि हमारे ज्ञान और संस्कृति के प्रसार में हिंदी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है (फाइल)

नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर कहा कि हमारे ज्ञान और संस्कृति के प्रसार में हिंदी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

विदेश मंत्रालय ने वस्तुतः विश्व हिंदी दिवस पर कार्यक्रम मनाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने की, विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक बयान में कहा।

इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के संदेशों का वाचन किया गया।

बयान के अनुसार, अपनी शुभकामनाएं देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंदी हमारे ज्ञान और संस्कृति को अपनी सादगी के कारण फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पीएम ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हिंदी के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ युवाओं में इसकी लोकप्रियता इसके लिए एक उज्ज्वल भविष्य प्रस्तुत करती है।

विदेश मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि हम सब मिलकर हिंदी को वैश्विक मंच पर ले जाने के अपने लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ रहे हैं।

सुश्री लेखी ने अपने संबोधन में कहा कि विदेश में हिंदी के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय द्वारा कई कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने भारतीय भाषाओं, संस्कृति और अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए विदेशों के विश्वविद्यालयों में 13 हिंदी कुर्सियों सहित लगभग 50 पीठों की स्थापना की है।

उन्होंने आगे कहा कि 100 से अधिक देशों में 670 से अधिक शिक्षण संस्थानों में हिंदी भाषा पढ़ाई जाती है।

श्री लेखी ने आशा व्यक्त की कि प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व और विदेश मंत्री के मार्गदर्शन में विश्व पटल पर हिन्दी का विकास जारी रहेगा।

विदेश राज्य मंत्री ने राजभाषा हिंदी में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने के लिए तीन पासपोर्ट कार्यालयों अर्थात बरेली, चंडीगढ़ और बैंगलोर के नामों की भी घोषणा की। उन्होंने पासपोर्ट कार्यालयों द्वारा प्रकाशित हिंदी होम जर्नलों में से तीन सर्वश्रेष्ठ पत्रिकाओं के पुरस्कार की भी घोषणा की।

सचिव (पश्चिम) रीनात संधू, अतिरिक्त सचिव (प्रशासन) और डीन, सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान, अरुण कुमार चटर्जी, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, पासपोर्ट कार्यालय, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, भारतीय वैश्विक परिषद, संरक्षक कार्यालय इस कार्यक्रम में भाग लेने वालों में प्रवासी और साथ ही भारतीय राजनयिक भी शामिल थे।



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